जब आप दुबई में प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो क्या दुबई सरकार को कोई टैक्स देना पड़ता है?

दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने पर कोई परचेज़ टैक्स नहीं लगता। इसके बजाय आपको दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) को एक बार 4% ट्रांसफर फीस देनी होती है, साथ में कुछ छोटी रजिस्ट्रेशन और सर्विस फीस। यहां कोई सालाना प्रॉपर्टी टैक्स नहीं है, व्यक्तियों की किराए की कमाई पर टैक्स नहीं है, और बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स भी नहीं है। लेकिन “दुबई में टैक्स नहीं” का मतलब हमेशा “कहीं भी टैक्स नहीं” नहीं होता, खासकर अगर आप अब भी भारत के टैक्स रेज़िडेंट हैं।

DLD ट्रांसफर फीस: कीमत का 4%

दुबई में किसी भी प्रॉपर्टी खरीद पर सबसे बड़ा सरकारी चार्ज DLD ट्रांसफर फीस है, जो खरीद कीमत का 4% होती है। यह टैक्स नहीं बल्कि रजिस्ट्रेशन फीस है, और ओनरशिप ट्रांसफर के समय एक बार दी जाती है। मार्केट के चलन के मुताबिक पूरी 4% फीस खरीदार देता है, हालांकि खरीदार और विक्रेता कॉन्ट्रैक्ट में इसे बांटने पर सहमत हो सकते हैं। कुछ डेवलपर्स ऑफ-प्लान बिक्री पर प्रमोशन के तौर पर इसका कुछ हिस्सा या पूरी फीस खुद भरते हैं। AED 15 लाख के अपार्टमेंट पर यह फीस AED 60,000 होती है।

खरीदते समय लगने वाले दूसरे चार्ज

चार्जआम तौर पर रकम
DLD ट्रांसफर फीसकीमत का 4%
टाइटल डीड / रजिस्ट्रेशन एडमिनरेडी प्रॉपर्टी के लिए करीब AED 580
ट्रस्टी ऑफिस फीसAED 5 लाख से कम पर AED 2,000 + VAT; AED 5 लाख और उससे ऊपर पर AED 4,000 + VAT
एजेंट कमीशनआम तौर पर 2% + VAT
मॉर्गेज रजिस्ट्रेशन (लोन लेने पर)लोन का 0.25% + AED 290
बैंक फीस (लोन लेने पर)लोन का 1% तक अरेंजमेंट फीस, साथ में वैल्यूएशन

कुल मिलाकर, कीमत के ऊपर करीब 6% से 8% का खर्च मानकर चलें, और मॉर्गेज लेने पर इससे ज़्यादा। अपना सटीक आंकड़ा हमारे दुबई प्रॉपर्टी परचेज़ कॉस्ट कैलकुलेटर से निकालें, और वो 7 खर्चे भी देखें जिन्हें खरीदार अक्सर भूल जाते हैं।

क्या प्रॉपर्टी खरीदने पर VAT लगता है?

  • नई रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी: कंप्लीशन के तीन साल के अंदर पहली बिक्री ज़ीरो-रेटेड होती है, यानी कोई VAT नहीं लगता।
  • रीसेल रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी: VAT से छूट प्राप्त है।
  • कमर्शियल प्रॉपर्टी (ऑफिस, दुकानें, वेयरहाउस): 5% VAT लगता है।

खरीद से जुड़ी सर्विसेज़, जैसे एजेंट कमीशन और ट्रस्टी फीस, पर VAT लगता है।

खरीदने के बाद: कोई सालाना टैक्स नहीं, पर कुछ अपवाद

दुबई में रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी रखने वाले व्यक्तियों को न सालाना प्रॉपर्टी टैक्स देना होता है, न किराए पर टैक्स, न बिक्री पर कैपिटल गेन्स टैक्स। हां, मालिकों को हर साल सर्विस चार्ज और म्युनिसिपैलिटी हाउसिंग फीस देनी होती है, जो टैक्स नहीं बल्कि फीस हैं। पढ़ें: दुबई में अपार्टमेंट रखने के सालाना खर्चे।

दो अपवाद अहम हैं:

  • कंपनी के ज़रिए मालिकाना हक। किसी कंपनी की किराए की कमाई और गेन्स पर UAE कॉर्पोरेट टैक्स लग सकता है, जो AED 3,75,000 से ऊपर के मुनाफे पर 9% है।
  • भारत का टैक्स रेज़िडेंट होना। भारत अपने रेज़िडेंट्स की दुनिया भर की कमाई पर टैक्स लगाता है। अगर आप भारत के टैक्स रेज़िडेंट हैं, तो दुबई फ्लैट का किराया और बेचने पर होने वाला मुनाफा भारत में टैक्सेबल है, और चूंकि UAE इन पर कोई टैक्स नहीं लेता, इसलिए कोई फॉरेन टैक्स क्रेडिट भी नहीं मिलता। आपको अपने भारतीय रिटर्न के Schedule FA में इस प्रॉपर्टी की जानकारी भी देनी होती है। ऐसा न करने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत पेनल्टी लग सकती है। हमारी दुबई में रहने वाले भारतीयों के लिए NRI टैक्स गाइड पढ़ें।

संक्षेप में: दुबई में कोई परचेज़ टैक्स नहीं है, लेकिन DLD फीस के लिए करीब 4% और सभी खरीद खर्चों के लिए कुल 6% से 8% का बजट रखें। अगर आप भारत के टैक्स रेज़िडेंट हैं, तो किराए और बिक्री पर भारतीय टैक्स की तैयारी रखें।

यह भी पढ़ें : दुबई प्रॉपर्टी टैक्स: इन्वेस्टर्स के लिए पूरी गाइड

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