दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने पर लगने वाली इनिशियल पर्चेज फीस ही वो चीज़ है जो इन्वेस्टर्स को दुबई की ओर खींचती है — क्योंकि यहां कोई सालाना प्रॉपर्टी टैक्स नहीं लगती।
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और, दुनिया के बहुत से रियल एस्टेट मार्केट्स की तरह यहां प्रॉपर्टी बेचने पर कोई कैपिटल गेंस टैक्स भी नहीं लगती।
तो पेमेंट कैसे होता है? सरकार सेल के वक्त एक बार की फीस वसूलती है। सबसे बड़ी है दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) ट्रांसफर फीस, जो प्रॉपर्टी की सेल प्राइस का 4% है।
नियम तो यह है कि बायर और सेलर दोनों को 50/50 यह फीस बांटनी होती है, पर हकीकत में लगभग हर डील में बायर ही पूरी 4% देता है, क्योंकि यही सेलर के साथ कोंट्रैक्ट में तय होता है।
DLD ट्रांसफर फीस के अलावा रजिस्ट्रेशन, एडमिन और सर्विस चार्ज भी जोड़ने पड़ते हैं — जैसे ट्रस्टी ऑफिस फीस और मॉर्गेज लेने पर मॉर्गेज रजिस्ट्रेशन फीस (लोन अमाउंट का 0.25%)। ये टैक्स नहीं हैं, पर बिज़नेस के लिए सरकार की फीस हैं।
इसके अलावा एजेंट कमीशन (आमतौर पर 2%) और अगर डेवलपर से सीधे ले रहे हैं तो डेवलपर फीस भी लग सकती है। कुल मिलाकर खरीद का एकतरफ़ा खर्च प्रॉपर्टी वैल्यू का लगभग 6–8% बैठता है।
इंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर्स को दुबई इसलिए पसंद आता है क्योंकि यह रकम एक बार चुकाने के बाद खत्म हो जाती है। न रेंटल इनकम पर टैक्स, न बेचने पर कैपिटल गेंस टैक्स — यही वजह है कि US और UK जैसे मार्केट्स के मुकाबले दुबई ज्यादा फायदेमंद लगता है।
बस एक चीज़ ध्यान रखें — सर्विस चार्ज। यह हर साल मेंटेनेंस और कॉमन एरिया के रखरखाव के लिए देनी पड़ती है। टैक्स नहीं है, पर आपके रिटर्न पर असर जरूर डालती है।
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