दुबई में अपार्टमेंट ढूंढना दूसरी जगहों से काफी अलग है, पर अगर सही तरीके से किया जाए तो प्रोसेस काफी आसान हो जाता है।
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सबसे पहले, तय करें कि रेंट पर कितना बजट है, कहां रहना चाहते हैं, और क्या यह खुद रहने के लिए है या इन्वेस्टमेंट के लिए। दुबई में लोकेशन सबसे ज्यादा मायने रखता है — डाउनटाउन, दुबई मरीना और पाम जुमेरा हाई-एंड लोकेशन माने जाते हैं (महंगे), जबकि JVC, दुबई सिलिकॉन ओएसिस और इंटरनेशनल सिटी जैसी जगहें आम तौर पर सस्ती में होती हैं।
बजट तय होने के बाद, प्रॉपर्टी फाइंडर, बयूत और दुबिज़ल जैसी बड़ी रियल एस्टेट वेबसाइट्स पर सर्च शुरू करें — तीनों रेगुलर अपडेट होती हैं और वेरिफाइड लिस्टिंग्स दिखाती हैं। प्राइस, साइज़, फर्निचर और बिल्डिंग की दूसरी खूबियों के हिसाब से फिल्टर लगा सकते हैं।
सिर्फ रेंट न देखें — सर्विस चार्ज (अगर खरीद रहे हैं) और बिल्डिंग की क्वालिटी भी जरूर चेक करें। ये सब आपके रीसेल वैल्यू को भी प्रभावित करते हैं।
अगला स्टेप है एक लाइसेंस्ड ब्रोकर ढूंढना। यह खासतौर पर जरूरी है अगर आप दुबई में नए हैं। यहां लाइसेंस्ड एजेंट्स को RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी एजेंसी) के साथ रजिस्टर होना होता है। ब्रोकर चुनते समय उसकी RERA रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें, और गैर-रजिस्टर्ड ब्रोकर से बचें।
विकल्प कम करने के बाद, व्यूइंग शेड्यूल करें — चाहे डिज़िटल हो या डायरेक्ट, ध्यान दें कि बिल्डिंग कितनी अच्छी मेंटेनेंस में है, पार्किंग कैसी है, और आस-पास क्या-क्या इंफ्रास्ट्रक्चर है (पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ग्रोसरी)। ज्यादातर फर्स्ट-टाइम बायर सिर्फ यूनिट देखते हैं, बिल्डिंग की स्थिति नजरअंदाज कर देते हैं — जबकि दुबई में यूनिट से ज्यादा बिल्डिंग मायने रखती है।
आखिर में, जब यूनिट फाइनल हो जाए तो प्रॉसेस सीधा है। रेंट करने वालों के लिए Ejari में टेनेंसी अग्रीमेंट रजिस्टर होता है, दस्तावेज़ (पासपोर्ट, वीज़ा, एमिरेट्स ID) देनी होती है और पेमेंट पोस्ट-डेटेड चेक्स से होता है। खरीदने वाले MOU साइन करके लगभग 10% डिपॉज़िट देते हैं और दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) के जरिए ट्रांसफर पूरा करते हैं।
सबसे जरूरी बात: दुबई एक डॉक्यूमेंट-ड्रिवन, रेगुलेटेड मार्केट है। यहां हर चीज़ फॉर्मल होती है, जो खरीदने-किराए देने वाले दोनों के हित में है।