दुबई में कॉन्डो खरीदने के बाद, क्या कोई सालाना टैक्स या अन्य फीस लगती है?

दुबई में कोई सालाना प्रॉपर्टी टैक्स नहीं है। लेकिन अपार्टमेंट रखने के कुछ सालाना खर्चे ज़रूर हैं: सर्विस चार्ज, म्युनिसिपैलिटी हाउसिंग फीस, यूटिलिटी बिल और इंश्योरेंस। ये बिल्डिंग चलाने और उसमें रहने की फीस हैं, मालिकाना हक पर टैक्स नहीं, लेकिन ये आपकी रेंटल यील्ड में अच्छी-खासी कटौती कर सकते हैं। हर साल किन चीज़ों का बजट रखना है, यहां जानें।

1. सर्विस चार्ज (सबसे बड़ा सालाना खर्च)

हर अपार्टमेंट मालिक बिल्डिंग की ओनर्स एसोसिएशन को सालाना सर्विस चार्ज देता है। इसमें सिक्योरिटी, सफाई, लिफ्ट, पूल और जिम, कॉमन एरिया की बिजली, बिल्डिंग का इंश्योरेंस और बड़ी मरम्मत के लिए रिज़र्व फंड शामिल होते हैं। जॉइंटली ओन्ड प्रॉपर्टी लॉ (लॉ नंबर 6 ऑफ 2019) के तहत सर्विस चार्ज RERA से मंज़ूर होने ज़रूरी हैं, और इनका भुगतान DLD के Mollak सिस्टम से होता है।

सर्विस चार्ज प्रति वर्ग फुट तय होते हैं, इसलिए हर बिल्डिंग में काफी अलग होते हैं। मिड-मार्केट अपार्टमेंट टावर्स में अक्सर सालाना करीब AED 12 से 25 प्रति वर्ग फुट लगता है, और प्रीमियम टावर्स में इससे काफी ज़्यादा। उदाहरण के लिए, AED 18 प्रति वर्ग फुट पर 1,000 वर्ग फुट के अपार्टमेंट का खर्च AED 18,000 सालाना होगा। खरीदने से पहले उस बिल्डिंग का मंज़ूर रेट DLD के सर्विस चार्ज इंडेक्स पर चेक करें। अलग-अलग इलाकों के आम रेट हमारे लेख दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने के छिपे खर्चे में देखें।

2. दुबई म्युनिसिपैलिटी हाउसिंग फीस

हाउसिंग फीस प्रॉपर्टी की सालाना किराया वैल्यू का 5% होती है, जो हर महीने DEWA (बिजली और पानी) बिल के ज़रिए ली जाती है। अगर आपने अपार्टमेंट किराए पर दिया है, तो आपका किराएदार इसे अपने DEWA अकाउंट पर भरता है। अगर आप खुद रहते हैं, तो अनुमानित किराया वैल्यू के आधार पर आप इसे भरते हैं। लोग अक्सर इसे प्रॉपर्टी टैक्स समझ लेते हैं, लेकिन यह घर में रहने वाले से जुड़ी म्युनिसिपल फीस है।

3. यूटिलिटी और डिस्ट्रिक्ट कूलिंग

DEWA बिजली और पानी का बिल भेजता है, और अकाउंट खोलने के लिए एक रिफंडेबल डिपॉज़िट देना होता है। कई टावर्स में डिस्ट्रिक्ट कूलिंग होती है, जिसका बिल कूलिंग प्रोवाइडर अलग से भेजता है, और गर्मियों में यह हर महीने का बड़ा खर्च बन सकता है। पूछें कि बिल्डिंग की कूलिंग सर्विस चार्ज में शामिल है या अलग से बिल होती है। इससे चलाने के खर्च में बड़ा फर्क पड़ता है।

4. इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और मैनेजमेंट

  • होम कंटेंट्स इंश्योरेंस: ज़रूरी नहीं, लेकिन सस्ता है। मॉर्गेज होने पर बैंक आम तौर पर प्रॉपर्टी और लाइफ इंश्योरेंस मांगता है।
  • यूनिट के अंदर की मरम्मत: AC सर्विसिंग, अप्लायंसेज़ और फिटिंग्स आपकी ज़िम्मेदारी हैं, बिल्डिंग की नहीं।
  • प्रॉपर्टी मैनेजमेंट: अगर आप मैनेजर के ज़रिए किराए पर देते हैं, तो फीस लगेगी, जो अक्सर सालाना किराए का एक प्रतिशत होती है।
  • Ejari: हर नई किराएदारी Ejari पर रजिस्टर करानी होती है, जिसकी एक छोटी फीस है।

क्या टैक्स-फ्री रहता है

  • कोई सालाना प्रॉपर्टी टैक्स नहीं।
  • व्यक्तिगत मालिकों की किराए की कमाई पर कोई UAE टैक्स नहीं।
  • व्यक्ति के बेचने पर कोई UAE कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं।

भारतीय टैक्स रेज़िडेंट्स के लिए अपवाद: अगर आप अब भी भारत के टैक्स रेज़िडेंट हैं, तो दुबई अपार्टमेंट का किराया भारत में टैक्सेबल है, और बेचने पर होने वाला मुनाफा भी। आपको अपने भारतीय टैक्स रिटर्न में इस प्रॉपर्टी की जानकारी भी देनी होती है। पढ़ें: दुबई में रहने वाले भारतीयों के लिए NRI टैक्स नियम।

बजट का उदाहरण

मान लीजिए 1,000 वर्ग फुट का अपार्टमेंट AED 1,00,000 सालाना किराए पर है, और सर्विस चार्ज AED 18 प्रति वर्ग फुट है। मालिक AED 18,000 सर्विस चार्ज देता है, और किराएदार हाउसिंग फीस और यूटिलिटी भरता है। मैनेजमेंट फीस, मेंटेनेंस या खाली महीनों से पहले ही किराए की कमाई AED 1,00,000 से घटकर करीब AED 82,000 रह जाती है। इसीलिए नेट यील्ड हमेशा बताई गई ग्रॉस यील्ड से कम होती है। अपना हिसाब हमारे दुबई रेंटल यील्ड कैलकुलेटर से लगाएं।

यह भी पढ़ें : दुबई में किराए पर रहें या प्रॉपर्टी खरीदें: भारतीय एक्सपैट्स के लिए गाइड

DUBAI TAX AND PROPERTY
Your trusted source for expert insights on Dubai tax regulations, residency, visas, and investment in Dubai’s real estate market.